मैनें मै पी है आज आंखों से
ज़िन्दगी जी है आज आंखों से
जो बात कह न सका कर न सका लफ़्ज़ों से
वो बात की है आज आंखों से
इक हसीं रात जिसे देख्नने की कोशिश थी
वो देख्न ली है आज आंखों से
जिस तसल्ली के लिये ठोकरें खाई थी कभी
वो तुमने दी है आज आंखों से
जो वासतों का, सबब का सवाल करते थे
वो हमन्शीं हैं आज आंखों से
उस्की बेताब सी नज़रों में मौज की लहरें
कैसे ठहरी हैं आज आंखों से
एक दिन ख्नाब में साक़ी से क्या कही थी विवेक
वही कही थी जो कही है आज आंखों से
This page contains poetries and ghazals created by me at different times in my life.
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लिफ़ाफ़े ( एक नज़्म )
उनकी यादों के लिफ़ाफ़े को आज खोला है कितनी प्यारी सी ये तस्वीर मिली है मुझको जी में आता है के सारे वो लम्हे फिर से जिऊँ क्या ख़बर कौन से प...
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तेरी यादों के लिफ़ाफ़े को आज खोला है कितनी प्यारी सी तेरी तस्वीर मिली है मुझको जी में आता है के सारे वो लम्हे जी भर लूं क्या खबर कौन से प...
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किसे बताएं के क्या हो रहा अपने संग वाक्या कोइ छुअन सी लगे जब भी चलती है कभी हवा किसी को देखने लगे हैं हम जब देखें आइना मेरे ख़ुदा ऐ ख़ुदा खुद ...
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ये दौलत की, दौड़ जो है, इसे शहरों में रहने दो | कभी मिलने जो घर आओ दोस्त को यार कहने दो || फिरंगी चाल ढालों को घर तलक लेके जाते हो | खुदा...
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