Thursday, October 13, 2011

Jagjit Singh - A Saadhu

इस साल ग़ज़ल को समझने वाले दो बड़े ही होनहार शख्स ज़िन्दगी को समझने गए हैं | Dr. Suresh Chandra Nadkarni मेरी बीवी जिनकी शागिर्द है, ग़ज़ल कि रगें समझते थे | इनकी शक्सियत को जितना समझो कम है | मुझे आपसे जो भी सीखने को मिला वो आपको मेरी बातों से थोडा कुछ समझ में आएगा | 

मैं जिनकी बनाई तर्जों की कसमें खाता था कभी वो ग़ज़ल गायिकी के बादशाह हैं और रहेंगे | उन्होंने कभी अपनी गायिकी को ग़ज़ल पर हावी नहीं होने दिया | वो सच्चे माइने में लिखी हुई ग़ज़ल का मतलब समझ कर फिर उसको सजाते थे | 

और भी ग़ज़ल गायक हैं इस दुनिया में मगर कहीं न कहीं सभी इस बात को भूल जाते हैं कि शायर की कही हुई बात पूरी तरह से अवाम को समझ आ रही है या नहीं |

ग़ज़ल अपने आप में एक ऐसी चीज़ है जो सिर्फ intellectual लोग ही समझ पाते हैं | ऐसे लोग जो इशारों कि समझ रखते हैं | जगजीत सिंह साहब बेशक ऐसे ही इंसान थे मगर उनकी ज़िद कुछ ऐसी थी के किसी भी शायर की पेचीदा से पेचीदा बातें आम अवाम को समझानी थी | और मैं समझता हूँ कि वो अपनी ज़िद में कामियाब हुए |

आम तौर पर जो कुछ शायर लिखता है वो समझ पाना किसी के लिए भी - पहली बात boring होता है और - दूसरी बात समझ काम नहीं करती |  ऐसे में ग़ज़ल को गा कर सुनना ज़रूरी हो जाता है क्योंकि जब शेर को बार बार गाया जाता है और सबसे बड़ी बात कि हलके फुल्के अंदाज़ में बताया जाता है तो ग़ज़ल जैसी पेचीदा चीज़ को समझने कि चाव पैदा होती है और लोग सुनते भी हैं |

ग़ज़ल तब तक जवान नहीं होती जब तक उसे गाया न जाए | मगर कई ग़ज़ल गायक इसे समझ नहीं पाते | ग़ज़ल को गाते समय बहुत ज्यादा technicalities जिनकी ज़रुरत नहीं भी होती है ... जैसे classical music गाने लग जाते हैं | ऐसे में ग़ज़ल जिसे समझाने चला था गायक कुछ और ही समझाने लगता है अवाम को | मैं समझता हूँ कि ऐसे गायक ग़ज़ल कि संजीदगी और मासूमियत को समझते ही नहीं हैं | इसलिए मुझे ये लगता है कि उनकी intellect की हदें बहुत सकरी होती हैं |

जगजीत सिंह साहब इस बात को अच्छी तरह समझते भी थे और उन्होंने अपनी ज़्यादातर compositions में इस बात का ख्याल रखा कि शायर की बात लोगों तक पहुचाना ही एक ग़ज़ल गायक का काम है |

मगर मुझे पता है कि energy कभी ख़त्म नहीं होती और जगजीत सिंह साहब की रूह किसी न किसी रूप में हमें फिर से बहलाने और शायरों के खयालात समझाने के लिए इस दुनिया में ज़रूर आएगी | फिलहाल "क्या है ज़िन्दगी" ये नज़्म इस साधु की याद में लिखी है | मेरा ख्याल है कि ये साधु इस बात को समझने कि कोशिश में कहीं दूर गया है | मगर वो आएगा ज़रूर क्योंकि energy कभी ख़त्म नहीं होती |

Kya Hai Zindagi

koi pooche hai kya hai zindagi
kya ye saansen hain kya hai zindagi
koi jalta hua dhuan hai ya
paani paani hai kya hai zindagi

sabko milta hai ek mauka magar
jaane kab koi sab ye jaanta hai
kya yahan aaye hain hasil karne
kya tamaasha hai kya hai zindagi

jo samajhte hain aklamand khud ko
wo kya samjhenge kya hai zindagi
dil dimagon ke pare baithta hai
jo samajhta hai kya hai zindagi

kya ye jakdan hai kya ye bandhan hai
in libaason me kya hai zindagi
koi aazaad kar de pinjar se
aur samjha de kya hai zindagi

kya hai jannat kya do zakh hai vivek
aur kya maut kya hai zindagi
jab nikal jaayega mera aakhiri dum
tab samajh ayega kya hai zindagi